Friday, 2 December 2011

सोनू से नंदोई तक


सोनू से नंदोई तक

 सबसे पहले तो गुरुजी को प्रणाम जिनकी वजह से हमें इतने हसीन किस्से पढ़ने को मिल पाते हैं, फिर प्रणाम है अन्तर्वासना के पाठकों को जिनके लिए मैं अपना एक हसीन किस्सा ब्यान कर रही हूँ जिसे पढ़कर उम्मीद है सबके अंडरवीयर तम्बू का रूप, आकार अपना लेंगे।
मेरा नाम है नंदिनी ! मैं एक दिलफेंक पंजाबन हूँ, मेरी पतली कमर, गोल-गोल गांड है, दो खरबूजे जैसे आकार में आ चुके मेरे मम्मे, जिन पर शायद ही किसी मर्द की नज़र न जाती होगी। मेरे मम्मों पर तो औरतों तक की नज़र टिकने लगती है। मैं एक शादीशुदा लड़की हूँ। स्कूल से ही मैं एक चालू लड़की रही हूँ। फिर कॉलेज में तो मैं हसीन रंडी बन गई, कई लड़कों के लौड़े चूत में डलवाए और उनके साथ होटलों में चुदाई करवाई। कभी-कभी लड़के किसी के दोस्त के घर की चाभी लेकर मुझे ले जाते और ठोकते।
मैं कुछ यादगार लम्हों से आपको रूबरू कराना चाहती हूँ जैसे कि मेरा पहला अवसर : किस से चूत की सील खुलवाई !
मेरा बचपन गाँव में निकला, वहीं मैं पली-बड़ी हुई, दसवीं तक मैंने पढ़ाई वहीं सरकारी स्कूल से की, हमारा संयुक्त परिवार था, चाचा-चाची, छोटे चाचा-चाची, हम लोग, दादा जी, दादी जी, घर तीन मंजिला था लेकिन सबका रसोई घर एक, खाना एक साथ खाया जाता था।
तब मैं जवान हो रही थी, करीब चौदह की थी जब चाची दुल्हन बनकर घर आई, क्या रूप था उन पर, गोरी-चिट्टी दूध जैसी, लेकिन वो चालू माल ही थी, उनमें बहुत हवस भरी हुई थी, है भी, मौका देखते ही चाचा को लेकर घुस जाती कमरे में !
एक दिन मैंने छुप कर देखा परदे से कि चाचा के ऊपर उनकी जांघों पर बैठी हुई चाची उनकी पैन्ट की जिप खोल उनका लौड़ा अपने आप ही निकाल कर हिला रही थी। ऐसे ही कई बार देखा। मुझसे भी अटपटे सवाल पूछती रहती थी।
खैर छोड़ो, अट्ठारहवें में कदम रखते ही लड़कों की नज़र मुझ पर आई और अब मेरे कूले कूले पटटों में चूत नाम की भट्ठी तपने लगी। लड़कों के इशारे देख देख आग में से मानो ओस गिरने लगी हो।
सोनू था नाम उसका जिस पर मैं सबसे पहले मर मिटी थी। बांका जवान गबरू पंजाबी लड़का था, गाँव में बस टांका फिट करने तक बात होती है, मिलने जुलने का प्रबंध खुद हो जाता है, छत से छत मिली होती हैं, खेत होते हैं, वहाँ तो पूरी ऐश होती है, न पुलिस का डर !
सोनू तो मानो मुझे चोदने के लिए पागल हुआ फिर रहा था। तीन चार बार उसने मुझे सूनी गली में पकड़ मेरे मम्मे दबाये थे, साथ में उसने मुझे चूमा था। दिन में घर में लगभग कोई कोई होता था, उस दिन किसी वजह से पंजाब में हाफ-डे की घोषणा हो गई थी लेकिन हमारे घर कौन सी अखबार आती थी। खेतीबाड़ी का काम था, उस दिन सुबह ही सोनू ने मुझे बता दिया कि आज हमारा मिलन हो सकता है, छुट्टी के बाद कच्चे वाले रास्ते से घर लौटना, खेतों में से होकर वो रास्ता आता था, कोई नहीं होता था, पूरी गर्मी !
आधे रास्ते आई कि किसी ने मेरी कलाई पकड़ी और मुझे गन्ने के खेत में खींच ले गया।
हाय सोनू ! मेरी कलाई छोड़ो ! दर्द होता है !
हाय मेरी जान ! आज तो दर्द देकर तुझे जन्नत में पहुँचाऊँगा !
कोई देख लेगा ! जाने दो !
कोई ना आवे !
वो मुझे खेतों के बीच में ले गया। वहाँ लगता था पहले किसी ने चुदाई के लिए जगह बना रखी थी, गोल सा दायरा बना हुआ था। सोनू ने मुझे बाँहों में ले लिया और चूमने लगा खुलकर। उसने मेरी कुर्ती में हाथ घुसा दिया, चुटकी से मेरे मनके मसलने लगा।
मैं सी सी सी करके जलने लगी।
उसने एकदम से मेरी सलवार का नाड़ा खींच दिया, सलवार नीचे गिर गई, मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने अपना हाथ मेरी टाँगों पर फेरा। जब हाथ मेरी फुद्दी पर गया तो मैं उछल पड़ी। उसने तुरंत मेरे होंठ चूसने शुरु किये, बोला- आज प्यास बुझा दे रानी !
उसने अपनी पैंट की जिप खोली और मोटा सा लौड़ा निकाल लिया, काफी लंबा भी था, बोला- चल, पकड़ कर सहला और मुठ मार !
बोला- इसको मुँह में लेगी?
मैंने मना किया- छीः गंदा !
एक बार स्वाद लेकर देख ! माँ कसम, रोज़ चूसने को कहेगी ! बैठ जा एक बार !
पहले अजीब सा महसूस हुआ, पर फिर अच्छा लगा तो मैं चूसने लगी।
बोला- चल, लेट जा नीचे !
मुझे नीचे सूखी घास पर चित्त लिटा कर मेरी टांगों के बीच में आया और बोला- जरा टाँगें खोल दे रानी ! तभी मजा आएगा !
मैंने टाँगें फैला ली, उसने अपने कन्धों पर रखवा कर अपने लौड़े के टोपे को फुद्दी पर घिसाया।
हाय, कुछ हो रहा है सोनू !
उसने सुपारा मेरी कोरी फुद्दी पर रख झटका मारा, उसका लन मेरी फुद्दी को उधेड़ता हुआ अपनी जगह बनाता हुआ अन्दर घुस गया।
मर गई सोनू ! फट गई मेरी ! निकाल दे ज़ालिम ! क्यूँ मुझे यमलोक दिखने लगा है !
साली आज तेरी खुजली मिटा कर तुझे परलोक से स्वर्ग लेकर जाऊँगा !
हाय कोई है? फट गई मेरी !
उसने देखते ही पूरा लन मेरी फुद्दी में उतार दिया और जोर-जोर से झटके लगाने लगा।
मैं हाय-हाय करती गई, लेकिन कुछ देर बाद न जाने खुद ही मेरे कूल्हे उठने लगे।
दोस्तो ! मैं लुट चुकी थी ! रंडी बनने का रास्ता मिल गया था मुझे !
उसने मुझे कई तरीकों से चोद-चोद निहाल कर दिया।
घर जाकर भी मेरी फुद्दी दुखती रही लेकिन जो मजा मुझे आया था वो भी नहीं भूला जा रहा था।
घर जाकर भी मेरी फुद्दी दुखती रही लेकिन जो मजा मुझे आया था वो लाजवाब था। यह बात मैं नहीं छुपा सकती क्यूंकि सच में चुदाई के अंत में असीम सुख मिलता है। मैं चुद चुकी थी, लौड़े का स्वाद मेरी फुद्दी के कोरे-कोरे गुलाबी होंठों को लग चुका था, उधर शेर के मुँह को मेरी जवानी का खून लग चुका था, आग दोनों तरफ पूरी-पूरी लग चुकी थी।
अब हम पुनः मिलने के लिए मौका देख-ढूंढ रहे थे।
एक दिन उसने मुझे एक मोबाइल लेकर दिया जिसको मैं अपने ब्रा में डाल कर रखने लगी।
उसने मुझे फ़ोन किया और बोला- मैं तुझसे मिलने को तड़फ रहा हूँ !
इधर भी यही हाल है राजा ! सोनू, मुझे तेरी बाँहों में आना है ! कोई हल निकालो, मिलने के लिए कुछ तो करो !
तभी मैंने उसे कहा- एक तरीका है, शाम को नहर के पास वाले गन्ने के खेत में आ जा !
शाम को मैंने देखा कि घर में सिर्फ चची और भाभी थी, मैंने कहा- मैं शौच के लिए खेतों में जा रही हूँ !
और भाभी को आँख दबा दी।
मैं वहां पहुंची तो वो पहले से ही वहाँ था। मिलते ही हम लिपटने लगे, मैंने उसके लौड़े को पकड़ लिया और मसलने लगी।
अरे ! बहुत आग लगी है? उसने कहा।
मैं बोली- बहुत !
उसने कहा- समय कम है ! सलवार उतार जल्दी से !
मैं बोली- कोई नहीं आएगा ! मुझे इसको चूसना है !
कह कर मैंने झुक कर उसका लौड़ा जड़ तक सहलाया और अपने मुँह में लिया।
लेकिन शायद उसे मेरी चूत चोदने में ज्यादा दिल्चस्पी थी, बोला- चल जल्दी से खड़ी हो जा ! उसने मेरी कमीज़ ऊपर उठाई, मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, न नीचे कच्छी गाँव की पूरी देहाती लड़की की तरह।
उसने सलवार उतार दी, दो मिनट मेरे मम्मे दबाये, सहलाए, चूसे और फ़िर मुझे सूखे घास पर चित्त लिटा दिया- टाँगें खोल !
मैंने पैर फ़ैला कर उसका लौड़ा अपनी फुद्दी में उतरवा लिया- हाय ! आज भी दर्द है ! लेकिन कम है !
वो झटके पर झटका लगाता गया, मैं जोर जोर से आहें लेने लगी।
बोला- साली, चुपचाप पड़ी रह ! किसी ने सुना तो फट जायेगी !
कुछ देर उसने मुझे घोड़ी बना कर ठोका और फिर अपना पानी मेरे अन्दर निकाल कर लुढ़क गया।
मुझे खास मज़ा नहीं आया था, मैंने अपने कपड़े ठीक किए और घर आ गई।
दो दिन बाद की बात है, मेरी चाची के पिता जी परलोक चले गए।
मेरे सभी घर वाले वहीं चले गए, सबका जाना बनता ही बनता था इसलिए। उस दिन तो भाभी को भी जाना पड़ा।
उधर खेतों में सीरी(नौकर) काम कर रहे थे, मुझे दिन में दो बार उनको खाना, चाय आदि बना कर भेजनी थी।
दोपहर का वक़्त था, मैं घर मेंअकेली थी, किस्मत माड़ी(बुरी) थी कि सोनू गाँव में नहीं था, उसके साथ फ़ोन पर लगी पड़ी थी।
दरवाज़ा खुला था, सोनू से फ़ोन पर सेक्सी बातें करते हुए मेरा एक हाथ सलवार में था।
तभी हमारा एक सीरी खाना लेने आया, उसका नाम था काला !
उसने मुझे इस तरह अपनी चूत में उंगली करते देख अपना औज़ार निकाल कर पकड़ लिया।
जैसे ही मेरी नजर उस पर पड़ी, मैं घबरा सी गई, उसके सामने ही सलवार से हाथ निकाला।
वो हल्की-हल्की हँसी हंसने लगा।
मैं शर्म से लाल हो रही थी।
वो बोला- वो खाना ?
मैंने उत्तर दिया- बाहर बैठो ! देती हूँ !
वो बोला- क्या देती हो? जो फ़ोन पर दे रही थी या उस दिन नहर वाले गन्ने के खेत में दे रही थी?
क्या भौंक रहे हो कुत्ते जैसे?
भौंक नहीं रहा, आँखों देखा हाल सुना रहा हूँ ! लगता है जवानी सम्भल नहीं रही ! बिल्कुल अपनी माँ-चाची पर गई है।
हरामजादे चुप कर !
बताता हूँ तेरे बाप को कि यह सोनू के साथ खेतों में जाती है।
मैं थोड़ा घबरा गई- ऐसा मत करना !
हमें क्या मिलेगा?
मैंने सोचा- नंदिनी तेरी फुद्दी में इस वक़्त सोनू ने चिंगारी लगा दी है, उस पर क्यूँ न काले का घी डलवा लूँ !
मैं होंठ चबाती हुई काले को देखती हुई बोली- क्या लोगे? आओ ! बताओ !
वो खुश हो गया- तेरी फुद्दी मारूंगा और क्या !
तू बहुत कमीना है !
कुण्डी लगा और कमरे में आ जा !
जब तक वो आता, मेरी कमीज़ उतर चुकी थी, उस दिन मैं लाल रंग की ब्रा पहने थी, उसमें कैद कबूतर देख काले के पजामे का तंबू बन चुका था।
उसने मुझे दबोच लिया, कभी सोचा नहीं होगा उसने कि कभी मेरी गोरी-गोरी फुद्दी मारेगा वो !
उसने मेरी सलवार खोल दी, नीचे कुछ नहीं था, वो अपना हाथ मेरी पहले से ही गीली फुद्दी पर फेरने लगा, मैं और गर्म हो गई।
वो मेरी ब्रा उतार पागलों जैसे मेरे मम्मे दबाने लगा, मेरे चुचूक अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था।
मैं भी उसकी दीवानी होने लगी।
मैंने उसका पजामा खोल दिया- हाय ! यह क्या है ?
काले का लौड़ा इतना लंबा था, मोटा था कि जैसे नाग उसके पजामे में कैद हो ! और उसकी पटारी खोलते वो फन फ़ैलाने लगे !
मेरे मुँह से निकला- मेरी बहुत नाज़ुक सी फुद्दी है काले ! यह मेरी फाड़ देगा।
बहन की लौड़ी ! मेरी बीवी इसको पूरा ले जाती है, तेरी चाची इसकी दीवानी है, मर्द का औज़ार जितना बड़ा हो औरत को उतना सुख मिलता है ! ले चूस के पूरा मजा ले ले !
चूसते चूसते वो इतना आकार ले गया कि चूसना मुश्किल होने लगा।
बोला- साली, खोल टाँगें !
संभाल संभाल कर डालना !
उसने अपना काला मोटा कोबरा नाग मेरी गुलाबी गोरी गोरी चिकनी फुद्दी पर रख आगे दबाया।
हाय मर गई ! काले, निकाल ले !
अभी देख तेरा क्या करता हूँ ! उसने जोर से एक झटका दिया, आधे से जयादा घुस गया।
मैं रोने लगी लेकिन काले ने पूरा डाल कर दी दम लिया।
फिर धीरे धीरे से झटके लगाने लगा। मेरी फुदी बेचारी मानो रो-रो कर कह रही थी- बचा लो ! बचा लो !
उसने भी पूरा नज़ारा लिया।
लेकिन जल्दी ही उसकी बात सही साबित हुई, मुझे मजा आने लगा।
वो बोला- कहे तो तेरी गांड में घुसा दूँ?
पागल हो क्या ? कमीने फाड़ देगा यह उसको !
चल आज छोड़ देता हूँ ! किसी दिन तेरी गाण्ड ज़रूर मारूँगा ! वो मर्द क्या जो औरत के किसी छेद को चोदे बिना छोड़े !
हाय सच ! ज़ालिम और मार ! बहुत मजा आ रहा है ! मैं कूल्हे उठा-उठा कर चुदने लगी।
बोला- घोड़ी बन !
मैंने मना कर दिया, मुझे डर था कि कहीं गांड में न घुसा दे।
मैं बोली- नहीं नहीं ! ऐसे ही चोदो ! और तेज़ी से चोदो ! बहुत अच्छे ! काले, और ले मेरी !
मैं झड़ने लगी, वो भी मेरी गर्मी से पिंघल गया और दोनों एक दूसरे को चूमते चाटते लुढ़क गए।
फ़िर मैंने जल्दी से कपड़े पहने और उसको खाना दिया।
इस तरह मैं कभी काले से, कभी सोनू से फुद्दी के मजे उठाती रही।
एक दोपहर खेत में काले के साथ नंगी गन्ने के खेत में चुद रही थी कि तभी वहाँ उसका दोस्त आ टपका, बोला- मुझे भी फुद्दी दे ! वरना भांडा फोड़ दूंगा !
मैं ना-नुकुर करने लगी।
काला बोला- साली फुद्दी ही देनी है ! दे दे ! तू कौन सी किसी एक से वफ़ा कर रही है?
काला मेरी फुद्दी ठोक रहा था। लग रहा था कि यह सब उसकी रजामंदी से हुआ था, उसने ही अपने दोस्त को बुलाया था।
उसका दोस्त मिन्टू अपना लौड़ा निकाल कर मेरे मुँह के पास लाया। मिन्टू का लौड़ा भी काफी मोटा था, उसने मेरे मुँह में डाल दिया।
काला बोला- चल आज घोड़ी बन !
और काले ने मेरी फुद्दी से गीला लौड़ा निकाला, थूक लगाया और मेरी गाण्ड में घुसा दिया।
मैं उससे बचना चाहती थी, उसके नीचे से निकलना चाहती थी, चीखना चाहती थी पर मुँह में लौड़ा था, शायद इसीलिए काले ने दोस्त को बुलाया था कि मुझे काबू करके मेरी गाण्ड मार सके !
दोनों ने मुझे दबा कर चोदा।
उस दिन जब घर गई तो माँ ने मेरी चाल-ढाल देखी और बोली- लगता है तेरी शादी करवानी होगी ! किसी-किसी के नीचे लेटती रहती है !
एक दोपहर मैं काले के साथ नंगी गन्ने के खेत में चुद रही थी तभी वहां उसका दोस्त आ टपका, बोला- मुझे भी फ़ुद्दी दे, वरना भाण्डा फोड़ दूंगा।
काला बोला- साली, फ़ुद्दी ही देनी है ! दे दे ! तू कौन सी किसी एक से वफ़ा कर रही है !
काला मेरी फुद्दी ठोक रहा था। लग रहा था कि यह सब उसकी रजामंदी से हुआ था, उसने ही अपने दोस्त को बुलाया था।
उसका दोस्त मिन्टू अपना लौड़ा निकाल कर मेरे मुँह के पास लाया। मिन्टू का लौड़ा भी काफी मोटा था, उसने मेरे मुँह में डाल दिया।
काला बोला- चल आज घोड़ी बन !
और काले ने मेरी फुद्दी से गीला लौड़ा निकाला, थूक लगाया और मेरी गाण्ड में घुसा दिया।
मैं उससे बचना चाहती थी, उसके नीचे से निकलना चाहती थी, चीखना चाहती थी पर मुँह में लौड़ा था, शायद इसीलिए काले ने दोस्त को बुलाया था कि मुझे काबू करके मेरी गाण्ड मार सके !
दोनों ने मुझे दबा कर चोदा, बोले- आज तेरी सारी गर्मी निकालनी है, साली कहे तो दोनों तरफ से घुसा दें?
हट कमीना !
उस दिन जब घर गई तो माँ ने मेरी चाल-ढाल देखी और बोली- लगता है तेरी शादी करवानी होगी ! किसी-किसी के नीचे लेटती रहती है !
और बोली- कहाँ कहाँ ख़ाक छान कर आती है, किस-किस यार से मिलती है?
माँ बकवास बंद कर अपनी ! मैंने जवाब दिया।
तेरे पैरों में जंजीरें डालने का बंदोबस्त कर रही हूँ !
पहले अपना बंदोबस्त कर ले माँ ! कोई बचा-खुचा हो तो उसको भी पटा ले ! लड़की की शादी के बाद यह सब छोड़ देना !
कुछ दिनों बाद मेरे एक दूर के रिश्ते में लगते चाचा की बेटी की शादी थी, माँ ने वहीं किसी लड़के वालों को मुझे दिखाने की पूरी योजना बना ली थी।
लेकिन वो लड़का तो देखना सो देखना था, वहाँ मेरी आँखें सोहन से लड़ गईं ,सोहन मेरी चाची का रिश्तेदार था, एक नम्बर का हरामी था, था बहुत हैण्डसम वो ! लड़की टिकाने का पूरा पाठ उसे आता था।
सभी जब नाच-गा रहे थे, मेरी आँख सोहन पर थी, उसने मुझे आँख मारी तो मैंने अपने निचले होंठ दांतों से काट गीली जुबां अपने होंठों पर फेर उसको हवा दे दी। उसको सीधा संकेत मिल गया था कि मैं उससे चुदना चाहती हूँ।
वो भी नज़र बचा कर अपना लौड़ा पकड़ लेता, पैंट के ऊपर से ही सहला देता। मैंने भी नज़रें बचा कर छाती से चुन्नी गिरा दी, मेरी चड्डी गीली होने लगी, दिल चुदने को होने लगा।
मैं वहाँ से उठी और उसे इशारा करके पिछवाड़े चली गई।
वहाँ कोई नहीं था, एक सीढ़ी लगी हुई थी लकड़ी की !
सोहन मेरे पीछे आया और फिर मौका देख हम ऊपर चढ़ गए। उसने ऊपर चढ़ने के बाद सीढ़ी भी ऊपर खींच ली ताकि कोई आ ही न सके।
सीढ़ी रखते ही मैं उसकी बाँहों में कस गई। ऊपर माउंटी का छोटा कमरा था जिस पर पानी की टंकी बनी थी। वहाँ घुस कर हम गुथमगुत्था होने लगे। उसने मेरी कमीज़ उतारी, होंठ चूमे, बोला- बहुत सुंदर है साली तू ! कब से आग लगा रही थी !
तुम भी तो सहला कर दिखा रहे थे !
चल छोड़ ! उसने लौड़ा निकाल लिया।
हाय कितना मस्त लौड़ा है तेरा !
मैं झुकी, मुँह में लेकर कुछ चुप्पे मारे।
उसने जल्दी से मेरी सलवार का नाड़ा खोल लिया और वहाँ पड़ी एक पुरानी दरी बिछा मुझे लिटा कर मेरी टाँगें ऊपर उठवा ली और अपना लौड़ा घुसा दिया।
क्या मस्त चुदाई करता था वो !
कुछ देर बाद उसने मुझे उल्टा करके घोड़ी बना लौड़ा डाला।
अह अह ! और चोद ! चोद चोद मुझे ! मैं झड़ने लगी- हूँम्म दे धक्का !
यह ले ! ले ले ! बोला- माल कहाँ डालू अंदर या पिएगी?
गांड में घुसा कर निकाल दे !
उसने थूक लगाया और घुसा दिया गांड में !
तू पक्की हरामन है !
हाय घुसा घुसा ! निकाल दे अपना पानी !
सोहन पानी निकालते हुए लुढ़क गया।
चुदने के बाद पहले मैं उतरी, फिर वह उतरा।
मैं कपड़े ठीक करने के लिए वहीं रुक गई।
पिछवाड़े से अंदर जाते मुझे माँ ने देख लिया, अंदर मुझे अलग लेजाकर बोली- पिछवाड़े से कहाँ से आ रही है? यहाँ भी मुँह मारती फिरती है? क्या करूँ तेरा?
अगले दिन शादी में मुझे लड़के वालों को दिखाया।
लड़के ने मुझे देखा, पसंद आई।
आती कैसे ना !
मेरी झोली में पांच सौ एक रुपये डाल रोक दिया।
माँ को चैन की सांस आई, अब उन्हें लगा कि अब तो जल्दी इसकी शादी करवा दूंगी। बेफिक्र होकर वो शादी देखने लगी।
मैं पैलेस में सबसे अगली लाइन में बैठी स्टेज पर चल रहा कार्यक्रम देख रही थी, आगे डांस-फ्लोर लगी थी। उस लड़के के दोस्त शराब पीकर नाच-कूद रहे थे। उनमें से दो लड़के मुझे घूर-घूर कर देख रहे थे, मानो अभी मुझे पकड़ना चाहते हों।
उन्होंने एक नेपकिन पर अपने मोबाइल नंबर लिख मेरे पाँव में फेंक दिया। मौका देख मैंने उठा लिया।
उन्होंने एक नेपकिन पर अपने मोबाइल नंबर लिख मेरे पाँव में फेंक दिया, मौका देख कर मैंने उठा लिया।
वो खुश होकर दोबारा नाचने लगे।
मैं लग ही इतनी पटाखा रही थी !
क्या करूँ ! भगवान ने ऐसे मम्मे दिए जिन्हें देख बुड्ढे का लौड़ा खड़ा हो जाए।
जवानी चढ़ी थी, मैं उठकर बाहर निकल गई हाल से बाहर पार्क में !
बाथरूम जाने के लिए निकली थी, वो भी मेरे पीछे पीछे आने लगे।
मुझे डर था कि कहीं माँ ना देख ले। उनके पास खड़ा होना भी खतरे भरा था। वो कार स्टैंड की तरफ चल पड़े, उनके पास बड़ी कार थी। उसमें बैठ कर मुझे बुलाने लगे। चाहते हुए भी मैं नहीं जा पा रही थी। फ़िर मौका देख भाग कर कार में बैठ गई।
क्या कार थी वो ! आलीशान कार !
दोनों ने पी रखी थी।
हाँ !क्यूँ बुलाया मुझे ?
एक कार चलने लगा, दूसरे ने मेरी कमीज़ उतार दी।
बोले- तेरी जवानी का मजा लेने के लिए !
छोड़ दो ! मुझे क्या समझ रखा है?
साली, अब नखरे छोड़ दे !
वो मेरे मम्मे दबाने लगा। उसने ब्रा का हुक भी खोल दिया मेरे कबूतर फड़फड़ा कर बाहर निकल आये। वो मेरा चुचूक चूसने लगा।
देखो, वहाँ मेरी माँ देख रही होगी कि कहाँ चली गई ! प्लीज़ मुझे जाने दो ! कल मिल लेना !
उसने लौड़ा निकाल लिया।
हाय यह कितना बड़ा है !
चूस दे रानी ! चल आज सिर्फ चूस दे !
कार एक खाली जगह में लगा दी, बोले- हम जर्मनी में रहते हैं, वहाँ यह सब होता है।
वो दूसरे वाले ने भी लौड़ा निकाल लिया कभी एक मुँह में देता, कभी दूसरा देता। दोनों के बड़े-बड़े लौड़े थे, मैं जल्दी-जल्दी चूसने लगी। वो मेरे चुचूकों को चुटकी से मसल रहे थे, दोनों ने मुझ से खूब लौड़े चुसवाये और मुझे दबाया-मसला।
हम अगले दिन मिलने का कह वापस आ गये।
अगले दिन वो मुझे होटल में लेकर गए और पूरा दिन चोदा, मोटे-मोटे लौड़ों से चोदा। उन्होंने मुझे बीयर पिला दी, नशे में दबाकर चोदा।
एक ने कहा कि उसकी तरफ पीठ करके उसके लौड़े पर बैठूं, उसने लौड़ा मेरी गांड के छेद पर टिकाया।
यह कहाँ?
साली, तेरी गांड में ! वो मर्द क्या जो लड़की का हर छेद ना छेदे !
गीला कर लो !
उसने थूक से गीला किया और गांड में घुसा दिया। दूसरे को बोला- तू इसकी फुद्दी मार !
नहीं ! कमीनो मारोगे मुझे ?
शट अप ! चल आ तू इसके ऊपर !
वो लौड़ा हिलाता हुआ आया और मेरी फुद्दी पर रख दिया, हलके से झटका दिया तो लौड़ा घुसने लगा।
यह पहला मौका था कि मेरे दोनों छेद चुद रहे थे।
कमीनो, मेरी शादी होने वाली है ! पहली रात पकड़ी जाऊंगी, तुम दोनों के घोड़े जितने मोटे लंबे हैं ! क्या करूंगी मैं ?
बोले- डर मत ! हमारे पास एक जैल है, उसको रात सोने से पहले ठीक से ऊँगली से अपनी फुद्दी पर लगा कर थोड़ी फुद्दी की फ़ांको में लगा लेना।
कब दोगे?
जब अगली बार अपनी फुद्दी देने आओगी।
आज तो पूरी फाड़ दी ! अभी कसर है कोई ?
उस दिन तो दोनों ने मेरी हालत बहुत पतली कर दी थी।
जाने से पहले एक बार तो तुझे आना होगा ! हमारी परसों शाम की फ़्लाईट है !
मैं उस दिन मिलने गई, उन दोनों ने मुझे खूब चोदा और जाते हुए एक जैल दी। रोज़ मालिश करने से फर्क दिखा, फुद्दी में कसाव लौटने लगा। मेरी शादी तय हो गई।
माँ बोली- करमजली ! अब लड़कों के साथ ख़ाक मत खाना !
सभी कार्यक्र्म निश्चित हो गए। मैंने जिस पार्लर में शादी वाले दिन तैयार होना था, उसने मुझे शादी से पहले दो बार प्री-ब्राईडल के लिए बुलाया।
सोनू को पता चल गया कि मैं घर से निकलने वाली हूँ। वो मिंटू को साथ लेकर पार्लर पहुँच गया, उसको ज्यादा पैसे देकर दोनों मुझे पिछले कैबिन में लेजा कर सहलाने लगे।
साली शादी करवा रही है? हमारा क्या होगा? हमें क्यूँ नहीं बताया रंडी साली ! जल्दी से नंगी होकर हमें अपनी चिकनी चिकनी हुई फुद्दी दिखा और हमारे लौड़ों से खेल ! कुतिया कहीं की ! तुझे हम कभी नहीं छोड़ने वाले ! मायके आकर हमें ही पति बनाएगी।
चल कमीना कहीं का ! मुझे नहीं मरवानी आज ! सुहागरात पर उसके लिए भी कुछ रखना है !
तेरी माँ की चूत !
दोनों मुझ पर टूट पड़े, कुछ ही पलों में उनके लौड़े मेरे मुँह में थे। दोनों ने मुझे वहीं ठंडी कर दिया।
क्या करती, पहले खुद उनको मुँह लगाया था। मुझे तो यहाँ तक डर था कि कहीं काला भी मुझे चोदने के मूड में हो तो?
उधर सोहन भी शादी में शरीक होने वहाँ आने वाला था, बेचारी एक मेरी फुद्दी जैल से कितनी कसी रहेगी !
खैर वही हुआ भी !
एक रात मैं भाभी के पास सो रही थी शादी से तीन दिन पहले !
रात को मेरी रजाई में मैंने किसी को पाया, उसने दबी आवाज़ में कहा- मैं हूँ काला ! चुप रह !
यहाँ क्यूँ आये हो? मैं धीरे से बोली।
रात के दो बज रहे हैं ! घोड़े बेच सो रहे हैं सभी !
रात को मेरी खाट पर मेरी रजाई में मैंने किसी को पाया।
उसने दबी आवाज़ से कहा- मैं हूँ काला ! चुप रह !
यहाँ क्यूँ आये हो? मैं धीरे से बोली।
रात के दो बज रहे हैं, घोड़े बेच सो रहे हैं सभी !
उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल घुटनों तक सरका जांघों को सहलाया। जैसे ही उसने मेरी फ़ुद्दी में हल्के से ऊँगली डाली, मैं धीरे धीरे सिसकारने लगी। कमीज़ ऊपर उठा कर वो मेरा दूध पीने लगा, मेरे मम्मे चूसने लगा, मेरे चुचूक चूसने लगा।
मैं भी बराबर उसके लौड़े को सहला रही थी। वहाँ मुँह लेना मुश्किल था।
उसने जल्दी से घोड़ी बना कर अपना लौड़ा घुसा दिया।
हाय मर गई ! काले, बहुत बढ़िया !
धीरे धीरे उसके कान के पास बोल मैं उसको उकसाने लगी- हाय रे ! तू मेरा सच्चा आशिक है ! चोद मुझे ! पटक पटक कर चोद ! हाय काले ! मेरे राजा ! क्या मस्त लौड़ा दिया भगवान् ने तुझे ! कोबरा !
साली, यहाँ कैसे जोर से करूँ?
चल निकाल ! छत पर जाती हूँ ! तू भी आ जाना !
मुझमें आग लग गई थी। अब शादी भूल सिर्फ काले का मोटा लौड़ा सामने था।
कोने में पड़ी एक तलाई को बिछाया और दीवार से लग में अपनी सलवार उतार बैठ गई और थूक लगा कर अपनी ऊँगली को अपनी फ़ुद्दी में डालने लगी।
वो ऊपर आया, आँख मार मैंने उसका स्वागत किया और उसने पास आकर अपना कोबरा मेरे मुँह में घुसा दिया- ले चूस !
कुछ देर बाद मैंने कहा- आज सिर्फ गांड दूँगी ! घोड़ी बना कर अपना मूसल लौड़ा डाल मेरी गांड में डाल !
वो जोर जोर से मारने लगा।
हाय ! यही काम नहीं हो रहा था नीचे ! हाय ! और चोद काले और !
मजे करके मैं नीचे लौट आई।
रात को लेडीज़-संगीत था, सोहन भी आ चुका था, उसकी आँखों में वासना झलक रही थी।
लेडीज़-संगीत हुआ !
करते करते रात का एक बज गया। सुबह मुझे जल्दी उठना था, पार्लर जाना था, वहां से तैयार होकर पैलेस पहुँचना था जहाँ दोपहर को मेरा लगन था।
एक मैं ही थी की ना सुधरी !
नाच-गाकर सभी थक कर सो गए क्यूंकि उठना तो सभी को जल्दी था क्यूंकि सुबह शादी थी। जैसे कि हमारे यहाँ एक रात पहले रिश्तेदार आते हैं, नाच गाने के बाद जागो निकाली जाती है, सारे गाँव में सर पर घड़ा उठा कर दिए लगा कर चक्कर निकालते हैं, लड़की घर रहती है।
मैं अपने कमरे में थी, सोहन वहाँ आ धमका।
मैंने उसे कहा- आज नहीं ! कल मेरी सुहागरात है ! क्यूँ मुझे बर्बाद करने पर तुले हो सभी !
उसने पी रखी थी, मुझे मसलने लगा।
वहाँ कोई नहीं था, बहुत मुश्किल से उसको हटाया।
रात को सोने की व्यवस्था ऐसे थी कि नीचे जमीन पर गद्दे डाले गए थे, मैंने रजाई ली और सोने लगी।
सोहन ने देखा कि मेरे साथ वाला गद्दा खाली पड़ा है तो वो वहाँ आ लेटा।
बत्ती बंद हुई तो दस मिनट बाद वो मेरे पास आ गया। नीचे धरती पर सो रहे थे तो कोई ख़ास दिक्कत नहीं थी।
थोड़ी दूर ही भाभी सो रही थी। सभी थके हुए थे।
सोहन ने मेरी सलवार खोल दी।
सोहन ! पागल हो गए हो क्या ? कल मेरा लगन है !
साली, लगन उसके साथ है ! ना कि मेरे साथ !
अगर इतनी बात थी तो पहले भाभी के ज़रिये मेरा हाथ क्यूँ नहीं माँगा था?
हाथ और तेरा? पागल हूँ क्या मैं? ना जाने कितनों से ठुकी है ! अगर तेरे से शादी हो तो शादी के बाद मुझे आने-बहाने मेरे सारे दोस्त आते जाते दिखाई देते घर में !
उसने ब्रा का हुक खोल दिया।
क्या मम्मे हैं साली तेरे ! न जाने किस-किस ने इन कबूतरों के पर कुतरे होंगे !
वो मेरी फ़ुद्दी सहलाने लगा और मेरे हाथ में अपना मोटा लंबा मूसल पकड़ा दिया।
देखो मैंने बड़ी मुश्किल से जैल की मालिश से कसाव लाई हूँ फ़ुद्दी में ! एक रात पहले दोबारा ढीली नहीं करवानी मुझे !
उसने मुझे मसलना शुरु किया।
यहाँ नहीं कुछ होगा ! बोला- मेरे साथ पीछे स्टोर में चल !
मैंने कहा- सिर्फ एक शर्त पर ! आज सिर्फ गांड दूँगी !
चल !
वहाँ जाते ही उसने मुझे दबोच लिया, मेरी सलवार उतार कर पास पड़ी पेटी पर फेंकी और गोलाइयों को सहलाने-दबाने लगा। उसने कुछ देर मेरा दूध पिया, फिर मैं खुद ही झुक गई।
उसने दोनों हाथों से चूतड़ खींच छेद पर लौड़ा रख झटका दिया।
सोहन का लौड़ा आराम से मेरी गांड में उतर गया।
सोहन ने एक घंटा मुझे ठोका, दो बार मेरी गांड में पानी छोड़ा।
उसके बाद हम दोनों वापिस जाकर सो गए।
माँ ने सुबह उठाया- जल्दी जल्दी उठ !
मुझे हल्दी लगाई।
सोहन बोला- दीदी, मैं इसको पार्लर छोड़ देता हूँ। फिर वहाँ से वापिस पैलेस ले जाऊँगा !
माँ ने मेरे साथ उसकी ड्यूटी लगा दी।

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