Friday, 2 December 2011

भाभी ने मेरी मार दी-1


भाभी ने मेरी मार दी-1


प्रेषक : विजय पण्डित
हम दोनों पड़ोसी थे, एक ही कॉलेज में और एक ही क्लास में पढ़ते थे। नोटस की अदला-बदली पढ़ाई में मदद, सभी कुछ साथ ही साथ चलता था। जाने कब धीरे धीरे यही सब कुछ प्रेम-पत्र की अदला-बदली और प्यार में बदल गया। नई और चढ़ती जवानी का प्यार था। इस प्यार में जोश अधिक था और होश कम था। रात के ग्यारह बजते बजते हम दोनों खिड़की खोल कर आपस में इशारे बाजी करते थे।
इसी तरह एक दिन काजल ने मुझे एक कुछ अजीब सा इशारा किया। मैं कुछ समझ नहीं पाया। वो बार बार मेरे लण्ड की ओर इशारा करके कहना चाह रही थी। मैंने असमन्जस में लण्ड की ओर इशारा किया तो उसके शरमा कर सर हिलाया।
मैंने पूछा- क्या करना है?
तो उसने मुठ बंद करके हिलाया। मैं कुछ झेंप सा गया। मैंने पजामे में अपना लण्ड पकड़ा और इशारा किया कि क्या ऐसे... ? उसे मुठ मार कर बताया।
उसने शरमाते हुये हाँ कहा।
मैंने समझा कि पजामा उतार कर उसे मुठ मार क दिखाऊँ। मैंने अपना पजामा उतार दिया और वो वहाँ से बार बार कुछ इशारे करती रही। मेरे शरीर के रोन्गटे खड़े होने लगे कि ये क्या मस्ता रही है। फिर भी मैंने उसे रिझाने के लिये अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। उसने अपना चेहरा दोनों हाथों से ढक लिया। ये सब देख कर मेरा लण्ड कड़क होने लगा... उसका शरमाना मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने अपना लण्ड उभार कर मुठ में भर लिया और अपना सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। वो अपनी आंखें फ़ाड़े देखती रही। मैं हौले हौले से मुठ मारने लगा। उसे गुदगुदी सी हुई।
उसके हाथ उसकी चूचियों पर पहुँच गये। मैंने इशारा किया कि अब वो अपनी चूचियाँ दिखाये।
काजल शरमा गई... उसने सर हिला कर मना कर दिया। फिर उसने अपनी नज़रें झुका कर अपनी चूचियों को देखा और उन्हें हिलाने लगी और बीच बीच में दबाती भी जा रही थी।
उसे देख कर मेरा लण्ड तन्ना उठा। मैं वास्तव में मुठ मारने लगा। अब वो मुझे बड़ी उत्सुकता से देख रही थी। कुछ ही देर में मेरे लण्ड से वीर्य उछल पड़ा। मेरा हाथ चलता रहा और पूरा वीर्य निकाल दिया।
मैंने उसे मोबाईल लगाया- काजल तुम भी तो कुछ दिखाओ !
अब चुप रहो और सो जाओ... ! उसकी खनकती हंसी सुनाई पड़ी।
अब हमारा यह रोज का कार्यक्रम हो गया, पर काजल बेईमानी कर जाती थी। वो मुझे कुछ भी नहीं दिखाती थी।
एक बार मैंने उसे अपने कमरे में आने को कहा तो वो मान गई। उस दिन घर में सब शादी में गये हुये थे। वो सावधानी से दीवार कूद कर मेरे कमरे में आ गई। यूँ तो हम कॉलेज में रोज मिलते थे पर वहाँ हम बात नहीं करते थे। हमारी दोस्ती के बारे में किसी को भी पता नहीं था। वो भी घर के पजामे में थी और मैं भी घर के पजामे में था। अन्दर भी अंडरवियर नहीं पहना था। मेरा लण्ड उसे देखते ही खड़ा हो गया था।
मजे लेगी इसके? मैंने अपना लण्ड हिलाते हुये काजल से पूछा।
अरे अन्दर तो चल... मजे लेने ही तो आई हूँ...! उसने मुझे कमरे में धकेलते हुये कहा।
चल आजा... आज तो मैं तुझे छोड़ूंगा नहीं !
तेरा लण्ड तो देख ना ... लगता है पजामा फ़ाड़ कर बाहर आ जायेगा ! वो धीमे से खिलखिला उठी। सच में मेरा लण्ड उसे देख कर ही बेकाबू हो रहा था।
कमरे में घुसते ही काजल बोली- विजय, तेरा लण्ड बहुत ही प्यारा है... लगता है पूरा ही अपनी चूत में घुसेड़ लूँ !
कभी खाया है लण्ड तूने?
हां, अभी तो खाया था ना... विक्की का...मस्त चुदाई की थी साले ने !
आज खायेगी मेरा लौड़ा...?
तेरी मर्जी... मैं तो खाने को तैयार हूँ, तभी तो आई हूँ यहाँ...! ऐ देख, मैंने तो बता दिया कि मैं तो चुदी-चुदाई हूँ... तूने भी कभी किसी को चोदा है या बस यू ही लण्ड लटकाये घूमता है?
अरे यार अब क्या कहूँ... भाभी मेरे से चुदवाती है...!
वाह तो हम दोनों एक ही थैली के हैं... निकाल अपना लौड़ा...! मेरे पजामे में हाथ मारती हुई बोली।
मेरा लण्ड पकड़ कर उसने हिलाया- लम्बा है यार ... !
चल पजामा उतार ... फ़टाफ़ट चुदाई कर लेते हैं, वर्ना बारह बजे तक तो सब आ ही जायेंगे।
उसने मेरे गले में हाथ डाल कर कहा- तब तक तो मेरी चूत तेरे लण्ड को खा चुकी होगी।
देखो तो सूरत से तो भोली नजर आती हो, और बाते लण्ड खाने की करती हो !
मैंने अपना पजामा उतार दिया। काजल ने भी देरी नहीं की... हम दोनों नंगे हो कर एक दूसरे को निहार रहे थे। मेरा लण्ड कड़क हो कर सीधा तना था। कड़क लण्ड देख कर उसकी चूत ने प्रेम रस की दो बूंदें निकाल दी और मेरा लण्ड थाम लिया।
हरामजादे, इतने दिन से तड़पा रहा था ... पहले लण्ड क्यों नहीं घुसेड़ दिया मेरी फ़ुद्दी में ?
इतनी उतावली मत हो, बस अब देर ही कितनी है, तेरी तो मैं मां चोद दूंगा !
वो लण्ड को दबाने लगी, मेरे लण्ड की हालत बुरी होने लगी। मैं उसके कठोर स्तन हाथ में थाम कर दबाने लगा। उसके मुँह से सिसकी निकल गई, साथ में गाली भी निकल गई- भेन चोद, घुसेड़ दे लौड़े को मेरी चूत में, साली लौड़े को देखते ही मचक मचक करने लगती है ... !
मेरे होंठ उसके होठो को चूमने और काटने लगे। उसने अपने आप को मेरे हवाले कर दिया।
काजल, तेरी गाण्ड के गोले मस्त है, फ़ाड़ दूँ मदरचोद को?
चूत मारे चोदू और गाण्ड मारे गाण्डू !
दोनों को जो मार दे, वो ही शेर है मेरे पाण्डु !
वह गांव में चर्चित एक होली की गाली कविता गुनगुना उठी, फिर खिलखिलाने लगी।
अरे वाह, बहुत पुरानी होली की कविता है ये तो ! पर देख मुझे ललकार मत !
ओफ़्फ़ोह, चल ना... चोद दे ना...!
मैं उसे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा... उसके दोनों पैर ऊँचे उठ गये, मैंने अपने लण्ड का जोर उसकी चूत पर लगा दिया। पहले तो हम दोनों ही बेकरारी में लण्ड और चूत को यहाँ-वहाँ सेट करके चुदाई की कोशिश करने लगे, पर लण्ड इधर उधर फ़िसल रहा था। पर इसमें मजा बहुत आ रहा था। तभी लण्ड को गुफ़ा मिल गई और सुपाड़ा उसमें समा गया। उसकी तंग चूत के कारण दोनों के मुख से सीत्कार निकल पड़ी। दोनों के अधर फिर से चिपक गये। आंखे बंद हो गई।
एक दो धक्को में लण्ड चूत में पूरा अन्दर तक बैठ गया। उसकी चूत में लहर सी चल रही थी... जो मुझे महसूस हो रही थी।
मेरी कमर धीरे धीरे चलने लगी और वो आनन्द से सिसकियां भरने लगी, मुख से मस्ती भरी आहें निकलने लगी। मैं भी आनन्द से सरोबार हो गया था। दोनों की कमर एक ताल से चलने लगी थी। उसके गोल कड़े स्तन मेरी छातियो में गड़े जा रहे थे, उसके कड़े चुचूक जैसे मुझे गुदगुदा रहे थे। मैंने अपनी आँखें खोल कर काजल को देखा, वो सुख के कारण अपने नैनो में सपने समेटे, बेहाल सी थी।
उसकी बड़ी बड़ी आँखें धीरे से खुली और सिसकते हुये बोली- मत देखो मुझे, आह्ह्ह्ह ... मैं चुद रही हूँ ... आ जाओ, हम एक हो जायें !
हां जानू, देखो तो तुम कितनी हसीन लग रही हो...!
राजा, तुम भी कितने मोहक लग रहे हो... मैं मर जाऊँ तुम पर ... हाय !
हम दोनों के शॉट तेजी से पड़ने लगे ... पसीने की बूंदे चेहरे पर चूने लगी। मैंने अपना शरीर अपने दोनों हाथो पर ले लिया और आगे से ऊपर उठ गया। काजल अपनी दोनों टांगों को पूरी फ़ैला कर चुदा रही थी। अब मेरा शरीर भी ऊपर उठ कर फ़्री हो गया था, अब शॉट मारने में मस्ती आ रही थी। तभी उसने चादर को अपनी मुठ्ठी में कस लिया और अपने दांत भींच लिये ... और आँखों को जोर से बंद कर लिया। उसने अपना रज छोड़ दिया और झड़ने लगी। मैंने चोदना चालू रखा।
"बस... राजा अब बस ... चाहे तो अब गाण्ड चोद दो !"
मैंने धीरे से अपना तन्नाया हुआ लण्ड बाहर खींच लिया। चूत के अन्दर की चिकनाई से पुता हुआ था। वो स्वयं ही उल्टी लेट गई और थोड़ी सी घुटनों के बल हो गई। उसके चूतड़ खिल गये ... चिकनी गाण्ड के बीच गुलाबी भूरा सा छेद अन्दर बाहर हो रहा था। तभी काजल ने अपनी क्रीम की शीशी दे दी। मैंने उसकी गाण्ड के छेद में क्रीम भर दी और अपनी अंगुली से उसे घुमा घुमा कर फ़ैलाने लगा।
"अरे वाह, बड़ा अनुभव है गाण्ड चोदने का..."
"भाभी की गाण्ड चोदता हूँ ना ... अब ले... घुसा ले !"
उसकी क्रीम से भरी गाण्ड में लण्ड आराम से घुस गया। उसके तंग छेद में लण्ड को बहुत मजा आ रहा था। धक्के भी आराम से चलने लगे थे। तंग छेद होने से मैं अधिक देर तक नहीं टिक पाया और कुछ ही देर में मेरा वीर्य निकल पड़ा।
"बड़ी डींगे मार रहे थे ... कुछ ही धक्कों में माल निकाल डाला ... चल अब जल्दी से बाहर निकाल ले, दर्द हो रहा है।"
पर लण्ड तो खुद ही सिकुड़ कर बाहर आ गया था। चादर से ही हम दोनों ने अपना लण्ड और चूत साफ़ कर ली। फिर हम दोनों ने लिपट कर एक चुम्मा लिया और उसने तुरन्त अपने कपड़े पहने और बाहर निकल कर अपने घर में कूद गई। चुपचाप सीढ़ियाँ चढ़ कर अपने कमरे में आ गई।
तभी बाहर खटपट की आवाजें आने लगी। जल्दबाजी में मैं बाहर आ गया। सभी लोग आ चुके थे। मम्मी-पापा अपने कमरे में चले गये और भाभी सीधे मेरे कमरे में आ गई। कमरे का नजारा देखते ही वो भांप गई।
"तो ये बात है ...! किसे चोद दिया आज देवर जी ?"
"नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है...!"
भाभी ने चादर उठाई और सूंघते हुये कहा,"तेरा माल तो निकला है ... और यह क्रीम की शीशी बता रही है कि कोई तो चुद कर गई है यहाँ से !"
मैंने भाभी को एक कोने में ले जा कर उसके मम्मे दबा दिये।
"चुप रहो ना भाभी ... आज तो आपकी चूचियाँ बहुत तन रही हैं?"
"वो साला राजेश, शादी में मेरे चूतड़ों को जाने कितनी बार दबा गया, और मम्मे तो जोर से मसल ही दिये थे।"
"तो चुदवा लेती ना भाभी..."
"साला गाण्डू निकला... मैंने उसे इशारा किया तो उसकी गाण्ड फ़ट गई।"
"बस ! तो मैं तो हूँ ना ... निकाल अपना भोसड़ा और हो जा मस्त !"
"पहले बता किसे चोदा?"
"काजल को, बहुत दिनों से मुझे तड़पा रही थी, आज मौका मिला तो चोद भी दिया और गाण्ड भी मार दी।"
"चलो किसी बाजारू को नहीं चोदा, वरना बीमारी का खतरा रहता है ना !"
तभी बिजली चली गई। मैंने मौके का फ़ायदा उठाते हुये भाभी के होंठ पर अपने होंठ जमा दिये। भाभी ने अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया। मैंने अपना लण्ड भाभि की चूत से चिपका दिया। भाभी को कहां चैन था, लगी कुत्ते की तरह धक्का मारने और मेरा लौड़ा चूत में घुसेड़ ही लिया। कुछ ही पलो में भाभी चुद रही थी। भाभी शायद पहले से बहुत उत्तेजित थी सो जल्दी ही झड़ गई। मेरा लण्ड खड़ा ही रह गया।
भाभी ने कहा,"अब मेरी बारी है ... रुक जरा..."
भाभी अन्धेरे में ही अपने कमरे में गई और कुछ उठा लाई।
"हां मेरे देवेर जी, अब बन जाओ घोड़ी..."
"मेरी गाण्ड मारोगी क्या..."
"कुछ ऐसा ही समझ लो ... चलो झुक जाओ, बहुत दिनों से कुछ अजीब सी इच्छा हो रही थी !"
"कैसी इच्छा ?"
"मन कर रहा था कि आज तो तेरी गाण्ड डिल्डो से मार कर मजा लूं, देखें तो तुझे कैसा मजा आता है?"
मैं हंसते हुये झुक गया। तभी मेरी गाण्ड में कुछ नरम सा लगा। भाभी ने मेरे कूल्हे दोनों हाथो से पकड़ लिये और अपनी कमर का जोर लगाया। उनकी कमर में बंधा हुआ डिल्डो मेरी गाण्ड में घुस गया।
"भाभी डिल्डो से मुझे चोदोगी क्या ?"
"चुप भी हो जा ... मेरी इच्छा हो रही थी तेरी गाण्ड मारने की, मजा आया कुछ?"
उसका डिल्डो मेरी गाण्ड में घुसता चला गया। अब उसने हाथ नीचे से बढ़ा कर मेरा तन्नाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और उसे सहलाते हुये मेरी गाण्ड मारने लगी। लण्ड मलने से मेरी उत्तेजना बढती जा रही थी। उसका डिल्डो मेरी गाण्ड को चोदने लगा था। मैंने अपने दोनों हाथ अंधेरे में पलंग पर टिका दिये थे और आराम से गाण्ड चुदवा रहा था। भाभी की नजाकत से गाण्ड मरवाने में बहुत मजा आ रहा था। भाभी के कोमल हाथों का स्पर्श भी मेरी उत्तेजना को भड़का रहा था।
"देवर जी, मजा आ रहा है ना ... पहले कभी मराई थी क्या ?"
"हां भाभी, कई बार मराई है, जब लड़कियाँ नहीं मिलती थी तो दोस्तों की मारते थे और दोस्त भी मेरी मारते थे। खूब मस्ताते थे।"
भाभी मेरा लौड़ा खूब जोर जोर से मसकने लगी... मेरा लण्ड फ़ूल कर मस्त हो चला था। मेरे सुपाड़े को बार बार दबाने से वो अब रस छोड़ने को तैयार हो चला था। मैंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया... लण्ड को भी फ़्री कर दिया। भाभी के लण्ड को जोर जोर से मचकाने से लगा कि अब निकला ... हाय अब निकला ... गाण्ड में डिल्डो भी बहुत आनन्द दे रहा था। ... और मेरे लण्ड ने जोर की पिचकारी निकाल दी ... भाभी का हाथ वीर्य से गीला हो गया। भाभी ने मेरा लण्ड निचोड़ कर सारा माल निकाल दिया और फिर डिल्डो भी निकाल दिया।
"मजा आया देवर जी?"
"हां भाभी बहुत मजा आया ... कुछ अलग सी चुदाई थी ना ..."
तभी बिजली आ गई। भाभी कमर से बांधा हुआ बेल्ट खोल रही थी..."
मैंने फिर से अपना पजामा पहना। भाभी ने भी कपड़े पहने और मुझे चूम कर अपने कमरे में चली गई। मैं धम से बिस्तर पर गिर पड़ा। थकान सी होने लगी थी। मन में जंग छिड़ी हुई थी कि कौन मजेदार है। एक तरफ़ जवानी से भरपूर 20 साल की मस्त नवयौवना और दूसरी ओर मेरी अनुभवी भाभी। विभिन्न तरीकों मुझे आनन्दित करती थी और काजल, मस्ती की दूसरी परिभाषा थी। खैर ! मुझे क्या। चुदाई तो दोनों की हो रही थी ना !!!
उन दोनों की चूत और गाण्ड की रोज तेल पिलाई और लण्ड के द्वारा दोनों छेदों की अन्दर बाहर की मालिश हो रही थी। मेर लण्ड भी अपना माल निकाल निकाल कर मस्त हो रहा था।

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