Wednesday, 27 May 2009

मस्त काम कहानी - १

मैं ऐसे ऑफिस में काम करता हूॅ। जहां काम करने वालों में लड़कियों व लड़कों की संख्या बराबर है । अधिकतर लड़कियां मिडल क्लास खानदानों से हैं जिस के कारण "सदाचार" का बहुत असर है चाहे आजकल के मॉर्डन ज़माने में इनका कोई मुल्य नहीं है ।

परन्तु इन सब लड़कियों में रिचा बिलकुल अलग है । वह काफी स्लिम है परन्तु उसके मम्मे और नितम्ब लाजवाब हैं । वह ५ फुट ३ इंच ऊंची है और उसकी छाती धरती की खींच को भी झुठला देती है। किस्सा तब शुरू हुआ जब हम दोंनों को किसी मीटिंग के लिये लन्च टाइम पर जाना पड़ा। जैसे आमतौर पर होता है मीटिंग कुछ घंटे चली और हम दोनों को बहुत भूख लग रही थी। कार की तरफ जाते हुये मैंने रिचा को कहा कि विम्पी या मैकडौनल्ड या के०एफ०सी० जो पास में थे जा कर नाश्ता कर लेतें हैं। रिचा बरगर नहीं खाना चाहती थी इस लिये हम के०एफ०सी० में घुस गये और क्रिस्पी चिकन ऑर्डर किया। कुछ देर बातें करते वार्तालाप कॉलेज ब्वायफ्रैन्डो इत्यादि की तरफ बढ़ा। रिचा ने बताया कि उसके कई पुरूष दोस्त हैं पर कोई ऐसा नहीं जिसे ब्वायफ्रैन्ड कहा जा सके।

यह तो हर भारतीय लड़की से समाज की चाह है कि उसके मां बाप उसके लिये एक लड़का ढूंढे और शादी करवा के लड़की को ऐसी ज़िदगी में धकेल दें जिस में उसकी बिलकुल नहीं चलती। खुशी या निरार्शा पति व ससुराल के अत्याचार्र किसी पर उसकी सुनवाई नहीं होती। रिचा ने मुझे बताया कि उसके पिताजी का देहांत तकरीबन दो वर्ष पहले हो गया था और घर पर सबसे बड़ी है। घरबार उसकी कमाई से ही चलता है। हालंकि अपनी ज़िन्दगी से उसे कोई शिकायत नहीं है पर उसके भाईयों का पढ़ाई छोड़ना और दोस्तों के साथ गुलछर्रे मनाना सबसे बड़ी समस्या है। इस कारण शादी की तरफ तो रिचा का ध्यान ही नहीं गया। चाहे उसकी आजकल की ज़िन्दगी कोई खास अच्छी नहीं है पर वह शादी से बहुत डरती है क्योंकि क्या पता उसका शौहर उसे प्यार करेगा या उसे बस एक अपनी हवस उतारने का साधन या बच्चे पैदा करने वाली मशीन बना के रख देगा। मैंने रिचा को २५ वर्ष की आयु में भी समझदार और दूरदर्शी पाया। जैसे जैसे बातें होती रहीं कुछ देर बाद र्वातालाप सेक्स के विषय के आस पास मंडराने लगा। जैसे कि रिचा ने कहा कि वह ढीले ढाले कपड़े इस लिये पहनती है क्योंकि उसकी चुचिया बड़ी हैं और बसों में सफर करते हुये वह अपनी तरफ ध्यान आर्कशित नहीं करना चाहती।

उसने यह भी कहा कि वह टाइट ब्रा पहनती है क्योंकि जब उसे भाग कर बस पकड़नी होती है तो उसकी चुचिया उछलती हैं। मैंने देखा खि जब रिचा बातें कर रही थी तो उसने अपने कंधे पीछे कर दिये थे और उसके दुधिया रंग की चुचिया कपड़ों मैं से उभर कर दिख रही थी। उसके निप्पल उभरे हुये थे और जब वह चिकन अपने रसीले अधरों से चूस चूस कर खा रही थी तो मेरा लण्ड अपने आप खड़ा होना शुरू हो गया। मैंने जब उसे बताया तो उसने शरमा कर अपना सिर मेरी तरफ घुमाया। उसकी सुन्दर मुखड़े से साफ ज़ाहिर था कि वह खुश थी कि उसने एक मर्द को उतेजित किया। वह बोली "आप मुझे अच्छे लगते हो परन्तु आप तो शादी शुदा हो। आप अपने जैसा कोई लड़का मेरे लिये क्यों नहीं ढूंढ देते।" खैर बातें करते करते इतना समय बीत गया कि हमंे एहसास हुआ कि शाम हो चुकी है और रिचा को घर पहुंचना है। चूंूकि हम दोनो का जल्दी अलग होने का मन बिलकुल नहीं था मैने उसे घर छोड़ने का प्रस्ताव दिया। वह कार में आगे की सीट पर बैठ गयी और मैंने गाड़ी चलायी। चलाते हुये मैंने देखा कि वह कनखियों से मेरी लातों के बीच बार बार नज़र मार रही थी और मैं भी उसकी प्यारी चुचिया जो इतनी उभर रहीं थी निहार रहा था। उसके निप्पल भी एैसे तने हुये थे जैसे कि ब्रा और कमीज़ में छेद कर देंगे। वह अपनी लम्बी व सुन्दर जांघों को कभी एक दूसरे के उपर रख रही थी और कभी उतार रही थी और ऐसे करते हुये बहुत सैक्सी लग रही थी। पर उस दिन और कुछ नहीं हुआ पर एक दूसरे का साथ हमें इतना अच्छा लगा कि हमने यह निश्चय किया कि हम ऑफिस के बाहर फिर मिलेंगे।

स्वभाविक था कि रिचा के इस बात का डर था कि कोई हमें देख न ले इस लिये यह भी तय हुआ कि जब भी हम बाहर निकलेंगे कार में लम्बी सैर के लिये चलेंगे। कुछ दिनों बाद हमने बाहर मिलना शुरू कर दिया। शहर के बाहरी तरफ जा कर हम खूब गप्पें मारते थे। हमारी बातें अपने परिवार अपनी समस्याआें। खास कर अपनी कामनाआें के बारे में थी। रिचा अभी कुंवारी थी परन्तु उसे सैक्स का बहुत सीमित ज्ञान था। यह स्थिति हर मिडल क्लास घर में पायी जाती है। मैं तो उसके स्तनों के साथ खेलने उसके कोमल अधरों को चूमने नर्म जांघों को सहलाने। उसकी पैंटी में घुसने के लिये बहुत तत्पर था परन्तु सीधापन देख कर मैंने निश्चय किया कि हर काम आहिस्ता होना चाहिये। वैसे भी मैं इस बात में विश्वास रखता हूॅं कि सैक्स और इश्क की पूर्ती तभी होती है जब दोंनो भागीदार बराबरी से शरीक हों। मैं चाहता था कि रिचा प्यार के बुखार में बहुत गर्म हो। जो न तो औफिस और न ही शहर में हो सकता था कियोंकि समाज की रोकें ऐसा होने नहीं देंगी। बातों के दौरान यह भी बिना बोले स्पष्ट था की जीवन की नइय्या पर इस नाते का कोई असर नहीं होना चाहिये। ना तो मेरी शादीशुदा ज़िदगी पर और ना रिचा के लड़का ढूंढने के संयोगों पर। रिचा अपने तरीकों से मेरी तरफ आकर्षण का इज़हार करती थी। जैसे कि मेरे कोट से धागे के कतरे हटाना या मेरी मूंछों से खाने का कतरा साफ करना इत्यादि और मैं भी उसकी पीठ पर हक से हाथ फेर कर या सड़क पार करते हुये उसके प्यारे नितंबों पर हाथ रख कर जैसे उसे पार करवा रहा हूं। जब भी उसके नितंबों को दबाता था तो ऐसा लगता था कि मैं सातवें आसमन में पहुंच गया हूं कसे और गोल और फिर भी इतनी नर्म और मखमली।

हमें मौका अचानक तब मिला जब हमारे अफसर ने बताया कि कम्पनी ने जयपुर में एक नुमायश में हिस्सा लेने का निश्चय किया है और रिचा हमारे स्टाल को देखेगी जब कि मैं नुमायश के सेमिनार अटैंड करूंगा। पोज़िशन के हिसाब से मेरी बुकिंग एक ५ स्टार होटल में की गर्उ थी और रिचा को एक पास के होटल में ठहराया ग्या था। नुमायश पास में एक प्लाज़ा में थी जे कि लगभग १ किलोमीटर दूर था। रिचा इस प्रोग्राम के बारे में सुन कर खुश तो बहुत हुई परन्तु उसे अभी अपनी मम्मी को मनाने की बाधा अभी पार करनी थी। भगवान का शुक्र था कि यह काम हमारे बॉस ने कर दिया। तो प्रोग्राम अनुसार मुझे रिचा को सुबह अपनी कार में लेना था और हम जयपुर के लिये रवाना होंगे। ५ घंटे का सफर जिसकी हम दोंनो को बेसब्री से इन्तज़ार थी। आखिरकार वह दिन चढ़ा और हम जयपुर के लिये रवाना हुये। सफर तो कोई खास नहीं था बस यही अन्तर था कि लोगों की नज़रों से दूर हमारे हाथों को एक दूसरे को छूने की छूट थी चाहे कपड़ों के उपर से।रिचा बहुत अच्छे मूड में थी क्यूंकि वह अपने शहर से कम ही निकलती थी। शाम को नुमायश से सीधे हम कार में जयपुर शहर और बाज़ारों की सैर करने निकल गये। रिचा के पास काफी डिब्बे थे जिन में हमारी कम्पनी के उत्पाद के बारे में पैम्फलेट और एक प्रोजेक्टर था जो हमने कार में रख दिया। बातें करते हुये हम काफी छेड़ छाड़ कर रहे थे। चूंकि हम अपने शहर से दूर थे और हमें कोई जानता नहीं था रिचा तो बहुत ही मस्त थी।

आपको याद होगा कि मैंने पहले बताया था कि रिचा ढीले ढाले पहनती है पर उसके पास कुछ ऐसी सलवार कमीज़ें भी थी जो उसकी सुंदर देह को इतना सेक्सी दिखाती थीं की मेरा आपे में रहना कठिन हो रहा था। उस दिन रिचा ने एक टाइट कमीज़ पहनी हुई थी जिस से उसके मम्मे उभर कर जैसे चिल्ला रहें हो कि इन्हें दबाओ। मैंने सोचा शायद रिचा मुझ से रोमांस करना चाहती है परन्तु मैं बनती बात बिगाड़ना नहीं चाहता था तो इस बात की पुष्ठी करने के लिये कोई कदम नहीं उठाया। होटल पहुंचने तक मैं रिचा की सुन्दर छवी के बारे में ही सोचता रहा। उसका गठा बदन बड़े बड़े स्तन उसकी पतली कमर और सीट पर रगड़ते हुये उसके नर्म गोल गोल नितंब। चूंकि नुमायश का सामान गाड़ी में छोड़ा नहीं जा सकता था मैंने कहा क्यों ना इन्हें मेरे कमरे में रख दें। कुछ देर की चुप्पी के बाद रिचा ने हामी भरी पर कहा कि कमरे में मैं अच्छे पुरूष की तरह बरताव करूं और मौके का फायदा ना लेने की कोशिश करूं।रिचा होटल की चमक दमक से इतनी मोहित थी कि प्रशंसा के पुल बांधती जा रही थी और बार बार कह रही थी कि उसने एैसी जगह कभी नहीं देखी। कमरे में पहुंच कर मैंने रिचा को पूछा कि वह क्या पीयेगी। मैं जानता था कि उसे शराब की गंध से सख्त नफरत है इसलिये मैंने उसके लिये "स्क्रूड्राइवर" का ऑर्डर दिया वोडका ह्यजिसमें कोई गंध नहीं होतीहृ और संतरे के जूस का मिष्रण जिससे उसे संतरे का ही स्वाद आये। रिचा को बहुत प्यास लग रही थी इस लिये उसने पूरा गिलास एक ही बार में गट गट करके पी लिया। बैठे बैठे जैसे कि थकान के कारण रिचा ने एक बहुत ही सैक्सी अंगड़ाई ली जिससे उसके मम्मे उभर गये जैसे कि दबाने का निमंत्रन दे रहे हों।

मैंने पूछा "क्या तुम्हारा सैक्स का मन नहीं करता"। उसने कहा "करता तो है पर कैसे करूं"। मैंने फिर पूछा "क्या तुम अपनी पुसी या योनी से खेलती नहीं " इस प्रश्न से वह वह पहले तो चौंकी और फिर बोली "ऊपर से सहलाने से कुछ कुछ अच्छा लगता है। मैंने टुथब्रश का हैंडल अन्दर डालने की कोशिश की थी पर दर्द के कारण ऊपर से मल कर रह गई।" मैं इन ख्यालों में खो गया कि रिचा का चुम्मा लेने में कितना मजा आयेगा। उसके प्यारे प्यारे निप्पल जेा ब्लाउज़ के नीचे साफ खड़े दिख जैसे चुसने और च्यूंटी मारने का निमंत्रन दे रहे हों। उसके कोमल हाथ मेरे लण्ड को सहला रहे हों। उसकी जीभ मेरे लण्ड को प्यार से चाट रही हो। उसके प्यारे होंठ मेरे लण्ड से निकले हुये अम्रत के कतरों को चाट रहें हैं। मेरा मन तो अपने गन्ने को उसके प्यारे मूंह में सरका के अपने र्वीय की वर्षा करने का कर रहा था। मैंने अपनी कल्पना पर लगाम लगाने की बहुत कोशिश की पर कुछ बस में नहीं लग रहा था। मैं रिचा की योनी की खु़शबू की कल्पना करता जा रहा था। क्या उसकी योनी ने अभ्यास किया कि अपने अन्दर सख्त टुथब्रश को भींच कर पकड़ ले। उसकी योनी के बाल नर्म और रेशमी होंगे क्या उसकी योनी भरपूर फिसलन के साथ गीली होगी। मेरे लण्ड को उसकी म्यान कितनी गर्मी पहूंचायेगी। मैं उसके कान के बूंदों वाली जगह को चाटना चाहता था। उसका मखमली पेट मेरे पेट को सहलाये। जब वह मेरे रसों को पी जाये तो अपने बैठे लण्ड को जैसे ही रिचा की जांघों पर रखा तो वह तन कर उसकी योनी में फिर दाखिल होने को तैय्यार हो जाये। जब वह झड़ने को तैय्यार हो तो क्या उसका स्वंयबल इतना कम हो जाता है कि उसकी सिसकियां बढ़ जाती हैं और वह अपने प्रेमी को ओर जोर से करने के लिये उतेजित करती है या नहीं। या चुप रहने की कोशिश में अपने होंठों को दांतों से काटती है। सवालों की सूची का कोई अन्त नहीं था और मेरे लिये एक जनून बन गयी थी।

रिचा पेशाब करने बाथरूम गयी और जब लौटी तो हैराानगी में बोली "इतना सुन्दर बाथरूम है। इसमें तो टब भी है और शावर भी।" विचारमग्न होते हुये बोली "मेरा मन हमेशा टब में नहाने का करता रहा है। आपको पता है कि मुझे बरसात का मौसम कितना पसंद है। शावर में बिलकुल बरसात की तरह नहा सकती हूं।" मैंने उसके कान में फुसफुसा के कहा "दोनों काम हो सकते हैं।" मैं कलपना कर रहा था उसकी नंगी सैक्सी देह शावर के नीचे उसके मम्मों से टपकता पानी जो टांगों के बीच उसकी योनी से होता हुआ सुन्दर लातों पर छोटी छोटी नदियां बनाता हुआ टब में गिर रहा था। "मैं गरम पानी चला देता हूं। टब भर जाये तो उस में तुम दोनों काम कर सकती हो।" वह जल्दी से मुड़ी उसके स्तन झूले और वह बोली "राज क्या कह रहे हो। मेरे पास यहां न तो कपड़े हैं और न ही तौलिया। अच्छा अब डिनर कर लेंऋ फिर मुझे होटल भी जाना है। सारा दिन नुमायश में खड़ी खड़ी मैं बहुत थक गयी हूं।" वह मुस्करायी और मैं कामना के तूफान में कुछ न कह सका। डिनर खा कर हम वपिस कमरे में पहुंचे।

मैंने मज़ाक में सुझाव दिया कि वह वहीं कमरे में क्यों नहीं रूक जाती। रिचा ने हॅस कर जवाब दिया "राज एक जैन्टलमैन की तरह मुझे इन चीज़ों को गाड़ी में पंहुचाने में सहायता करोगे कि नहीं" और कागज़ों के ढेर व डिब्बों की तरफ इशारा किया। हमने दिब्बे उठाये और कमरे से बाहर ले जा कर रखने लगे। रिचा मेरे पीछे थी इसलिये दरवाज़ा बंद करने के लिये झुकी तो उसके प्यारे गोल गोल नितम्ब मेरे मूंह के सामने झूमें कि अचानक एक चीख मारी और मेरी ओर गिरी। मेरे हाथों में दिब्बे होने के कारण मैंने उसे गिरने से बचाने के लिये अपने आप को आगे किया। रिचा ने एक हाथ से मेरा कंधे का सहारा लिया और दूसरे हाथ से मेरी बैल्ट के बकल को पकड़ कर मेरे खड़े लण्ड की तरफ धक्का दिया। च्यूंकि मेरा लोड़ा तन तना कर खड़ा था यह पक्का था कि उसके हाथों ने मेरी उतेजता को भंाप लिया होगा। उठते हुये रिचा का बांया स्तन मेरी दंायी बंाह से रगड़ा। मैं इतना उतेजित हो गया जितना पूरे दिन में न हुआ था। उसने कहा "उफ़ बाल बाल बची। शुक्र है कि आप पास थे।" मैने कहा "कुछ भी तो नहीं था" और अपनी फटी आवाज़ पर काबू करने की कोशिश की। रिचा एक पल के लिये चौघियाई और उसके प्यारे मुखड़े पर मुस्कराहट की रोशनी चमकने लगी। उसने अपना हाथ मेरी बैल्ट से हटाया और गिरे हुये कागज़ों को बटोरने लगी।

अचनक खड़ी हो कर उसने कहा "कूछ तो था राज। आपने मुझे गिरने से तो बचाया ही लेकिन आपके हाथों से एक भी डिब्बा नहीं गिरा। मेरे ख्याल में आपको एक चुम्मी का इनाम मिलना चहिये।" मेरा लण्ड फड़कने लगा। रिचा ने मेरे होंठों पर चुम्मा लिया। उसका मूंह पूरा खुल नहीं था। उसकी ज़ुबान मूंह के अंदर ही थी पर मूंह पूरा बंद भी नहीं था।उसके होंठों के स्पर्ष से मेरा मूंह खुला और मेरे होंठों ने उसके होंठों को खोला ताकि मेरी ज़ुबान उनको चाट सके। मेरा शरीर उसके शरीर से चुम्बक की तरह चिपका हुआ था। मेरी बांहें उसके पीछे थी और उसके मुलायम नितंबों को सहला रहीं थी। उसकी बांहें मेरे गले के उपर लिपटी थी और वह मेरे साथ चिपकी हुयी थी। उसकी प्यारी देह मेरे उतेजित लण्ड के साथ रगड़ रही थी। रिचा ने वापिस उसी उतेजना के साथ मुझे चूमा और उसकी ज़ुबान ने मेरे मुंह के अन्दर ताांडव नृत्य शुरू किया। यह पूर्ण शरीर का चुम्मा था जिसमें भविष्य में कामुकता का वादा था। जो सम्भोग से भी कहीं अधिक उतेजना पैदा कर गय था। मुझे एहसास था कि रिचा मुझ से अपनी गीली योनी में अपना लण्ड डालने की मंाग करेगी। जेा अन्दर बाहर तब तक आरी की तरह चलेगा जब तक हम दोंनों प्रबल उतेजना की बाढ़ में बह जायेंगे। वह मुझे अपनी योनी को ज़ुबान से इतना उतेजित करने को कहेगी कि उससे खुशी के आंसु बहने शुरू हो जायें। वह किसी भी कीमत पर मेरे लोड़े को चूसने की अनुमती मांगेगी और फिर इतना चाटेगी और चूसेगी कि मेरे लण्ड से वीर्य की पिचकारियंा उसके मुखड़े पर वर्षा करेंगी। और उससे अपनी नर्म चमड़ी पर मालिश करेगी कि कामुकता में मेरा बीज और गंध उसमें समा जायें। मुझे उन सब सवालों का जवाब पता था।

मुझे उसके नशीले होंठों कामुक्त निप्पलों़़ सैक्सी नाभी मीठी योर्नी सब का स्वाद पता था। मुझे उसकी पीठ़़ उसके नितम्बों उसके हाथ मेरे ट्टटों पर और मेरा लण्ड पर उसकी कोमल योनी की पकड़। सब का र्स्पश पता था। उसकी सिस्कियां जो संगीत की तरह थी उन पर नाचना आता था। ओह कितना उतेजित करने वाला मेरे लण्ड को चूसना उसकी ज़ुबान का मेरे लण्ड के टोपे पर झूमना उसके मूंह की नर्मी जो मेरे लण्ड को और भी उतेजित कर रही थी कि मैं आपे से बाहर हो कर अपने वीर्य की वर्षा उसके स्तनों हाथाे़ं बांहों योनि पर करने से रुक नहीं पाया। इन सब चीज़ों का ज्ञान मुझे उन पलों में आया जब रिचा और मैं कस कर आलिंगन कर रहे थे और कामुक्ता के बुखार में विर्सजित हो कर अपनी अन्दर की भावनाआें को प्रकट कर रहे थे। मैंने अपने हाथों को उसके नितम्बों से सरका कर उसके उभरे हुये स्तनों पर रख दिया। हम अचनक अलग हुये और आंखे खोली। रिचा ने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे कार की लाइट में एक हिरण चौंकता है और सिर हिला कर बोली "हम ऐसे नहीं कर सकते"। मैंने बुझे स्वर में कहा "रिचा हम तैय्यार हैं। हमें अब अगला कदम लेना है।" वोह चीखी "नहीं। हम चुदाई नहीं कर सकते। हमारे सम्बंध दफ्तर के काम के कारण हैं। हम इक्ठ्ठे काम करते हैं।" "ओह रिचा। तुमने वही अनुभव किया जो मैंने अनुभव किया। मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं रिचा बिलकुल वैसे ही जैसे तुम्हारी योनी मेरे लण्ड की प्यासी है।" मैं बहुत उतेजित था और मेरी सांस भी फूल रही थी। किसी तरह शब्द मेरे मूंह से निकले "मैं तुम्हारे कपड़े उतारूंगा और तुम मेरे। तुम मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेने को तत्पर हो। तुम मेरे बड़े लोड़े को अपने मूंह में ले कर इसका स्वाद लेने का इन्तज़ार नहीं कर सकती। मुझे पता है कि अभी जो चुम्मा लिया था वह चुदाई से कम नहीं था। हमने चुदाई तो कर ली है बस अब फिर से करनी है।" उसने सिर हिला कर कहा "नहीं।" "तुम मेरी जान हो और मैं तुम्हारा ग्ा़ुलाम।" वह चुपचाप मेरी तरफ देखती रहै।

"रिचा"

मैं उसकी तरफ बढ़ा "यह हमारे बस में नहीं है। और कोई रास्ता भी नहीं है। मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है और तुम्हें मेरी। जब हम कर नहीं लेते तुम मेरे बारे में सोचती रहोगी। तुम करना चाहती हो।" मैं रिचा को अपनी बांहों में लेने के लिये और उसका चुम्म लेने के लिये आगे बढ़ा "तुम्हें यह चहिये। तुम्हें दुनिया में इस पल इससे ज़्यादा और कुछ नहीं चाहिये।" वह झटक कर अचानक अलग हो गयी और कस के मेरे गाल पर एक थप्पड़ मारा। "नहीं" वह चिल्लाई। "मैं ऑफिस का तुम्हारा एक किस्सा नहीं बनना चाहती। मुझे तुम्हारा लौडा नहीं चाहिये।" अब वह गुस्से से लाल हो गई थी। "मुझे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है। एक दिन मेरा भी शौहर होगा जे मेरी योनी की चुदाई करेगा। मैं उसका इन्तज़ार कर सकती हूं। जब वोह चाहेगा मैं उसका लण्ड भी चूसूंगी। और तुम्हारी बीवी भी तो है। तुम एक अय्याश हरामज़ादे हो।"

मैं उसके गुस्से से दंग रह गया। क्या मैंने उसकी उतेजित अवस्था को गलत समझा था। क्या उसका पैंट के ऊपर से लण्ड का छूना उसकी मुस्कानाे़ं उसकी चुलबुलेपन को गलत पढ़ा था। क्या मैं इतना गया गुज़रा हूंऋ वह ऐसे झूठ क्यों बोल रही हैऋ क्या मैं पागल हो गया हूंऋ रिचा कमरे में आगे पीछे घूमने लगी और वैसे ही जोर जोर से बोलने लगी " और यह प्यार व्यार तकदीर सच्ची मोहब्बत। यह सब जो तुम कह रहे हो कहीं नहीं मिलते। मेरे पास प्यार है और मुझे यह किसी साथ में काम करने वाले से एक अशलील किस्से के रूप में नहीं चाहिये। मेरे से ऐसी बातें न करो।" मेरे दिल में तूफान चल रहा था। मेरा सिर चक्कर खा रहा था और मैं बाथरूम की तरफ भागा। लम्बी सांसे ले कर और मुॅह पर पानी फेंक कर मैंने अपनी दिल की तेज़ रफ्तार को कम किया। फिर मैं वपिस रूम में आ कर बैड पर लेट गया। एक टक छत को देखता रहा। मेरा दिमाग उबल रहा था। मैंने अपने दफ्तर का सबसे अच्छा दोस्त तो खो ही दिया था। और यदि वह इस बारे में हमारे मैनेजर से कह देती है तो शायद नौकरी भी। और बात अगर घर तक पहुंच जाती है तो शादी का भी क्या कहना। लगता है कि मैं पागल हो रहा हूं। मैंने अपना सर तकिये पर रखा और रोने वाला हो गया। मैंने अपने आप से कहा "राज इस बार तो अपनी चुदा ली है।" शायद मेरी आंख कुछ पलों के लिये लग गयी क्योंकि जब होश आया तो मेरी गालें गीली थीं। किसी ने पुकारा "राज"।
मैंने अपनी गालें पोंछी और बोला "क्या"।

"राज मेरी तरफ देख सकते हो"

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